करवाचौथ पर विशेष गीत – Happy Karva Chauth

छोड़ दोगी मेरा साथ यदि तुम प्रिये,
इस जहाँ के अँधेरों में खो जाऊँगा।
ढाँप लो जो मुझे नेह की छाँव में,
बेखबर ज़िन्दगी से मैं हो जाऊँगा।
तुम ही वीणा के तारों की झंकार हो,
मेघ-मल्हार तुम ही हो आसावरी
एक स्वर-लिपि तुम्हीं, और लय हो तुम्हीं 
ताल-संगीत की तुम हो जादूगरी 
तुम मेरी गीतिका तुमको गाते हुये 
नींद कुछ पल सुकूं वाली सो जाऊँगा
छोड़ दोगी……..
ऋतु बसंती बसी मन्द मुस्कान में,
श्रावणी मेघ से ये उमड़ते नयन,
पूस की शीत रातों से कँपते अधर,
देह-स्पर्श ज्यों जेठ की हो तपन
प्रेम-पात्रों में घोलो मुझे रंग सा 
नख से शिख तक तुम्हें फिर भिगो जाऊंगा|
छोड़ दोगी…
प्रेम की पुंज द्वापर की तुम राधिका,
त्याग की मूर्ति सतयुग की तारामती
भाव में, भक्ति में तुम ही मीरा लगीं
सत्य, निष्ठा में त्रेता की सीता सती।
अब युगों की तरफ कोई देखे भी क्यूँ,
देखने और को मैं भी क्यों जाऊँगा।
छोड़ दोगी…
मैं अमावस की रातों में भटका बहुत,
पर सितारे मेरा साथ देते रहे,
डूबने को भँवर भी बहुत थी मगर 
दो किनारे तेरा नाम लेते रहे।
आज भागीरथी तुम मिलीं भाग्य से
पाप जाने-अजाने मैं धो जाऊँगा।
छोड़ दोगी…

– डा.विष्णु सक्सैना