gulzar gali poster 1

गुलजार लफ्जों को कुछ इस तरह से बुन देते हैं कि दिल की तह तक पहुँच जाते हैं| उनके लिखे अल्फ़ाज़ रोम-रोम में दौडने लगते है| ग़ुलज़ार की गली में हर नज़्म, हर हर्फ़ आपको अहसास दिलायेगी खुद के होने का; कभी आपके ज़ख्मों को कुरेदेगी तो कभी ज़ख्मों को सीयेगी भी|अल्फ़ाजों से अहसासों तक पहुंचती इस गली में आपका स्वागत है|

फ़सादात /रात पश्मीने की / गुलज़ार

कायनात / रात पश्मीने की / गुलज़ार

वक्त / रात पश्मीने की / गुलज़ार

गुलज़ार की बोस्की /Gulzar Ki Boski

नज़म उलझी हुई है सीने में

 बस तेरा नाम ही मुकम्मल है

किसी मौसम का झौंका था (Raincoat) by Gulzar

raincoat

सामने आए मेरे देखा मुझे बात भी की (त्रिवेणी )

गुलज़ार की बेहतरीन नज़्में | Gulzar Poetry


तुम्हारे साथ पूरा एक दिन बस खर्च करने की तमन्ना है !