Festivals Poetryगुडी पडवा (हिन्दू नववर्ष)

Happy Gudi Padwa | गुडी पडवा (हिन्दू नववर्ष) – Prayer

 

सनातन भारतीय संस्कृति में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष माना जाता है। इसे संवत्सर प्रतिपदा भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन से सृष्टि का आरम्भ हुआ था। सिन्धी समाज का प्रख्यात पर्व चेटिचंड भी वर्ष प्रतिपदा के अगले दिन शुरू होता है। शुक्लपक्ष में चांद अपने पूरे सौन्दर्य के साथ आकाश में विराजमान होता है इसलिए चैत्रचंद्र का देशज रूप हुआ चैतीचांद और फिर सिंधी में हुआ चेटिचंड। महाराष्ट्र में यह पर्व गुड़ी पड़वा के नाम से मनाया जाता है। इस दिन दान का महत्व हैं साथ ही नौ दुर्गा के दिन का प्रारम्भ भी इसी गुड़ी पड़वा से होता हैं सभी इस दिन से घरो को शुद्ध कर पूजा पाठ करते हैं | कई लोग गणगोर माता का विवाह रचते हैं | त्यौहार भारत देश की धरोहर हैं इनकी मान्यता दिल की भावनाओ से जुड़ी होती हैं |

सूर्य संवेदना पुष्पे:, दीप्ति कारुण्यगंधने| लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ||

Nav Varsh Shlok In Sanskrit:

सूर्य संवेदना पुष्पे:, दीप्ति कारुण्यगंधने|
लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ||

Surya Samvednapushpayeh Deeptih Karunyagandhane, 
Labdhva Shubham Navvarshesmin Kuryatsarvasya mangalam.

Nav Varsh Shlok In Hindi:

जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, पुष्प देता है, संवेदना देता है और हमें दया भाव सिखाता है उसी तरह यह नव वर्ष हमें हर पल ज्ञान दे और हमारा हर दिन, हर पल मंगलमय हो |

I wish God, please give us blessings and intellect in this new year as like A sun gives us flower, emotions and teaches mercy.

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