Hindi-Urdu Poetry

ज़ाकिर भी लिखूं तो जिक़्र उन्ही का आता है

ज़ाकिर भी लिखूं तो जिक़्र उन्ही का आता है

ज़ाकिर1 भी लिखूं तो जिक़्र उन्ही का आता है

खुदा में भी हमें बस नजर वो आता है

अब इबादत भी उनको याद करने से होती है

उनकी गली से गुजरना ज़ियारत2 हो जाता है

मायने:

  1. ज़ाकिर: भगवान् की प्रशंसा की कविता
  2. ज़ियारत: तीर्थयात्रा

 

एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली

एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली

जमाना गुजर गया किसी को देखे हुए


बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो

बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो

इन बादलों की बूंदो में एक अश्क हमारा भी हो


इक मुलाकात क़ी दरकार थी, इक अरसे से हमें

इक मुलाकात क़ी दरकार थी, इक अरसे से हमें
गुज़र चला इक अरसा, तुम्हारी ‘न-‘न’ सुनकर


रंग ओ रोशनी ने रूखसत ले ली जिंदगी से

रंग ओ रोशनी ने रूखसत ले ली जिंदगी से
सफ़ेद कागज़ पर काली स्याही तो तडपते हुए देखा है


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