अहमद फ़राज़

तुझ को देखें तो आँख भरती नहीं / अहमद फ़राज़

क्यूँ तबीअत कहीं ठहरती नहीं

क्यूँ तबीअत कहीं ठहरती नहीं
दोस्ती तो उदास करती नहीं


हम हमेशा के सैर-चश्म सही

हम हमेशा के सैर-चश्म सही
तुझ को देखें तो आँख भरती नहीं


शब-ए-हिज्राँ भी रोज़-ए-बद की तरह

शब-ए-हिज्राँ भी रोज़-ए-बद की तरह
कट तो जाती है पर गुज़रती नहीं


ये मोहब्बत है, सुन, ज़माने, सुन!

ये मोहब्बत है, सुन, ज़माने, सुन!
इतनी आसानियों से मरती नहीं


जिस तरह तुम गुजारते हो फ़राज़

जिस तरह तुम गुजारते हो फ़राज़
जिंदगी उस तरह गुज़रती नहीं

~ अहमद फ़राज़

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