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मधुशाला – हरिवंशराय बच्चन

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा, सबसे पहले तेरा …

नशा हम किया करते है, इलज़ाम शराब को दिया करते हैं

नशा हम किया करते है, इलज़ाम शराब को दिया करते हैं; कसूर शराब का नहीं उनका है जिनका चेहरा हम जाम में तलाश किया करते हैं। तनहइयो के आलम …

यूँ तो ऐसा कोई ख़ास याराना नहीं ​है ​मेरा

यूँ तो ऐसा कोई ख़ास याराना नहीं ​है ​मेरा​;​ ​​शराब से…​ इश्क की राहों में तन्हा मिली ​ तो;​​​ हमसफ़र बन गई…….​ उम्र भर भी अगर सदाएं दें; बीत …