अज्मल अज्मली

  • अज्मल अज्मली

    क़्ते-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ बिखरा हुआ हयात का दफ्तर समेट लूँ फिर जाने हम मिलें न मिलें इक…

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