अख़्तर नाज़्मी

  • अख़्तर नाज़्मी

    1. कब लोगों ने अल्फ़ाज़ के पत्थर नहीं फेंके वो ख़त भी मगर मैंने जला कर नहीं फेंके ठहरे हुए…

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