Month: October 2015

रावण

“सीते, राघव की परिणीता हो लेकिन, जो सच है उसको तो कानों से सुन लो, जो अनुचित लगे निकालो अपने मन से, पर कुछ भी तथ्य लगे तो उसको …

आदमी बुलबुला है पानी का …

आदमी बुलबुला है पानी का और पानी की बहती सतह पर टूटता है डूबता भी है फिर उभरता है फिर से बहता है ना समंदर निगल सका है इसको न तवारीख तोड़ …