Hindi-Urdu Poetryमिर्जा गालिब

हर एक बात पे कहते हो तुम के ‘तू क्या है

har ik baat pe kahate ho tum ke tu kya he mirza ghalib shayri ghazal

हर एक बात पे कहते हो तुम के ‘तू क्या है ?
तुम ही कहो के यह अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है ?

[ गुफ्तगू = conversation ]

ना शोले में यह करिश्मा ना बर्क़ में ये अदा
कोई बताओ की वो शोख-ए-टुंड_खो क्या है ?

[ बर्क़ = lightning, टुंड = sharp/angry, खो. = behavior ]

यह रश्क है की वो होता हम_सुखःअन तुमसे
वागरना ख़ौफ़-ए-बद_आमोज़ी-ए-अडू क्या है ?

[ रश्क = jealousy, हम_सुखःअन = to speak together/to agree, ख़ौफ़= fear, बद = bad/wicked, आमोज़ी= education/teaching, अडू = enemy ]

चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी जेब को अब हाजत-ए-रफू क्या है ?

[ पैराहन= shirt/robe/cloth, हाजत= need/necessity,रफू = mending/darning ]

जला है जिस्म. जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेडदते हो जो अब राख, जूस्तजू क्या है ?

[ जूस्तजू = desire ]

रागों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आंख ही से ना टपका तो फिर लहू क्या है ?

वो चीज़ जिसके लिए हमको हो बहिशित अज़ीज़
सिवाय बाड़ा- ए -गुल_फाम – ए – मुश्कबू क्या है ?

[ बहिशित (या बिहिशित, दोनों सही हैं) = heaven, बाड़ा= wine, गुल_फाम = delicate and fragrant like flowers, मुश्कबू = like the smell of musk ]

पियूं शराब अगर .खम भी देख लू दो चार
यह शीशा-ओ-क़दह–कूज़ा- ओ – सुबो क्या है ?

[ .खम= wine barrel, क़दह= goblet, कूज़ा- ओ – सुबो = wine pitcher ]

रही ना ताक़त-ए-गुफ़तर, और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिए के आरज़ू क्या है ?

[ गुफ़तर = speech/discourse ]

बना है शाह का मुसाहिब, फिरे इतराता
वागरना शहर में ‘ग़ालिब’ की आबरू क्या है ?

[ मुसाहिब = comrade/associate ]

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